आत्मज्ञान की संक्षिप्त भूमिका

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आत्मज्ञान की संक्षिप्त भूमिका- वेदान्त कहता है कि सम्पूर्ण सृष्टि में एक अखण्ड , अनादि , अनन्त , अविनाशी , निर्षिकार , अव्यक्त , आकाशवत् परिपूर्ण , स्वयं प्रकाश चेतन तत्त्व व्याप्त है ,

जिसे शास्त्रों में ब्रह्म , परमात्मा , आत्मा , परमेश्वर , हरि तथा भगवान् आदि अनेकों नामों से कहा गया है ।

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आत्मज्ञान की संक्षिप्त भूमिका वेदान्त कहता है

कि सम्पूर्ण सृष्टि में एक अखण्ड , अनादि , अनन्त , अविनाशी , निर्षिकार , अव्यक्त , आकाशवत् परिपूर्ण , स्वयं प्रकाश चेतन तत्त्व व्याप्त है , जिसे शास्त्रों में ब्रह्म , परमात्मा , आत्मा , परमेश्वर , हरि तथा भगवान् आदि अनेकों नामों से कहा गया है ।

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